साहित्यिक संग्रह

रचनाएँ और विचार।

कविता, कहानी, संस्मरण और जीवन से निकले छोटे-बड़े विचार।

कविता · कंचन

जब ख़ामोशी बोलने लगी

कुछ ख़ामोशियाँ आवाज़ से अधिक कहती हैं। वे हमारे भीतर जमा उन शब्दों को सँभालती हैं जिन्हें कहने का सही समय शायद कभी आया ही नहीं।

आगे पढ़ें ↗
विचार · गरिमा

अधूरी चीज़ों की खूबसूरती

क्या हर कहानी को अंत चाहिए? शायद नहीं। कुछ अधूरेपन हमें लंबे समय तक अपने बारे में सोचने के लिए छोड़ जाते हैं।

आगे पढ़ें ↗
संस्मरण · कंचन

अपने पुराने ख़तों के नाम

पुरानी लिखावट में अपना ही एक पुराना चेहरा दिखाई देता है। कुछ चिट्ठियाँ समय को वापस नहीं लातीं, लेकिन स्मृति को ज़रूर जगा देती हैं।

आगे पढ़ें ↗
कहानी · गरिमा

दो संवादों के बीच

एक सवाल और उसके उत्तर के बीच जो थोड़ी-सी ख़ामोशी होती है, शायद वहीं सबसे सच्ची कहानी रहती है।

आगे पढ़ें ↗